मुहूर्त और पंचांग टूल्स
मुहूर्त चिन्तामणि और निर्णय सिन्धु के पंचांग-ढांचे पर आधारित शास्त्रीय मुहूर्त चयन।
मुहूर्त वह शुभ काल-खण्ड है जो शास्त्रीय पंचांग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — के पाँच अंगों से चुना जाता है। मुहूर्त तब चुना जाता है जब पाँचों अंग सहमत हों, वर्तमान होरा के स्वामी से बल प्राप्त हो, और मानक दोषों (राहु-काल, यम-घण्ट, गुलिक-काल, दोष-तिथियाँ) से मुक्त हो।
प्रामाणिक ग्रंथ हैं मुहूर्त चिन्तामणि (राम दैवज्ञ, 1600 ईस्वी) और निर्णय सिन्धु (कमलाकर भट्ट, 1612 ईस्वी); विवाह-मुहूर्त, गृह-प्रवेश और वाहन-क्रय पर विशिष्ट विवेचन स्मृति-साहित्य में बिखरा हुआ है। इस पृष्ठ के टूल्स पंचांग-गणना पर आधारित मुहूर्त-खिड़कियाँ उत्पन्न करते हैं — सामान्य "शुभ-दिवस" खोज नहीं — और प्रत्येक विकल्प के लिए परिकलित तिथि, नक्षत्र, योग, करण दिखाते हैं ताकि पण्डित जी चयन की पुष्टि कर सकें।
संबंधित अवधारणाएँ
Ekadashi
एकादशीThe eleventh tithi; devatā Viśvedevas, Nandā-class, classical register of fasting and Viṣṇu-devotion.
Purnima
पूर्णिमाThe fifteenth tithi of Śukla-pakṣa (full moon); devatā Chandra-Soma, Pūrṇā-class, classical register of completion and fullness.
Amavasya
अमावास्याThe fifteenth tithi of Kṛṣṇa-pakṣa (new moon); devatā the Pitṛs (class-plural), classical register of ancestral observance and inner-darkness.
Rohini
रोहिणीThe fourth nakshatra (10°–23°20′ Vṛṣabha), ruled by Chandra; presided by Prajāpati, classical register of growth, fertility, and beauty.
Pushya
पुष्यThe eighth nakshatra (3°20′–16°40′ Karka), ruled by Śani; presided by Bṛhaspati, classical register of nourishment and dharmic protection.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुहूर्त और शुभ तिथि में क्या अंतर है?
क्या राहु-काल और यम-घण्ट एक ही हैं?
क्या कोई भी पंचांग-ऐप जिस दिन को शुभ बताए, वह उपयुक्त है?
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