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मुहूर्त और पंचांग टूल्स

मुहूर्त चिन्तामणि और निर्णय सिन्धु के पंचांग-ढांचे पर आधारित शास्त्रीय मुहूर्त चयन।

1 टूल्स उपलब्ध

मुहूर्त वह शुभ काल-खण्ड है जो शास्त्रीय पंचांग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — के पाँच अंगों से चुना जाता है। मुहूर्त तब चुना जाता है जब पाँचों अंग सहमत हों, वर्तमान होरा के स्वामी से बल प्राप्त हो, और मानक दोषों (राहु-काल, यम-घण्ट, गुलिक-काल, दोष-तिथियाँ) से मुक्त हो।

प्रामाणिक ग्रंथ हैं मुहूर्त चिन्तामणि (राम दैवज्ञ, 1600 ईस्वी) और निर्णय सिन्धु (कमलाकर भट्ट, 1612 ईस्वी); विवाह-मुहूर्त, गृह-प्रवेश और वाहन-क्रय पर विशिष्ट विवेचन स्मृति-साहित्य में बिखरा हुआ है। इस पृष्ठ के टूल्स पंचांग-गणना पर आधारित मुहूर्त-खिड़कियाँ उत्पन्न करते हैं — सामान्य "शुभ-दिवस" खोज नहीं — और प्रत्येक विकल्प के लिए परिकलित तिथि, नक्षत्र, योग, करण दिखाते हैं ताकि पण्डित जी चयन की पुष्टि कर सकें।

संबंधित अवधारणाएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुहूर्त और शुभ तिथि में क्या अंतर है?
शुभ तिथि चयन का केवल एक अंग है — केवल तिथि। पूर्ण मुहूर्त तब चुना जाता है जब पंचांग के पाँचों अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) सहमत हों और मानक दोषों से मुक्त हों। इसलिए प्रत्येक मुहूर्त शुभ तिथि पर होता है, परंतु प्रत्येक शुभ तिथि उपयोग-योग्य मुहूर्त नहीं देती।
क्या राहु-काल और यम-घण्ट एक ही हैं?
नहीं — दोनों दैनिक अशुभ काल-खण्ड हैं, परंतु अलग विधि से गणित किए जाते हैं। राहु-काल 90-मिनट का काल-खण्ड है जिसकी स्थिति वार के अनुसार निर्धारित होती है। यम-घण्ट यम को आवंटित एक अलग काल-खण्ड है। गुलिक-काल तीसरा ऐसा काल-खण्ड है। शास्त्रीय मुहूर्त-चयन तीनों से बचता है।
क्या कोई भी पंचांग-ऐप जिस दिन को शुभ बताए, वह उपयुक्त है?
सामान्य "शुभ-दिवस" ऐप्स प्रायः केवल तिथि-स्तर की स्वीकृति दिखाते हैं। विवाह, गृह-प्रवेश, व्यवसाय-प्रारंभ जैसे प्रमुख मुहूर्तों के लिए पाँचों अंगों का पूर्ण परीक्षण तथा दोष-काल से बचाव आवश्यक है। यहाँ के टूल्स प्रत्येक अंग को दिखाते हैं ताकि आप (या समीक्षक पण्डित जी) पाँचों की सहमति की पुष्टि कर सकें।

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